शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

फर्क

(29)

फर्क

भीड़ नहीं थी
बस में ज्यादा
पर गर्मी थी
बेसक ...
खाली थी
सीट पीछे की
पर गुथे थे लोग
महिला –सीट के
आगे-पीछे ।
जब मैं उतरा
भेद खुल गया
हर-तरफ
पसीने की
मिली-जुली
अजीब बू थी

और
महिला सीट के
आस- पास
अनवरत
खुसबू थी ।

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