देश की पुकार यही है
देश की पुकार यही है
जन जन की हुंकार यही है
हर माँ की दुआ यही है
थाम लेना यह पतवार हमारा.
जन्म- दिन का
यही उपहार तुम्हारा ।
बहे पसीना जिसका खेत में
उसको रोटी जरूर देना
रोटी देना ...
रोटी के सपने मत देना
गरीबी का अहसास मिटाना
शस्य- श्यामला तब खुश होगी
गर्व से सर होगा ऊंचा
जन्म- दिन का
यही उपहार तुम्हारा ।
आंचल हो रहा मेरा छोटा
खो रहीं मेरी
हिमगिरि की श्रंखला
मोड़ रहा क्यों
मेरी नदी की धारा
रह- रह कर कोई
मेरे पैर खींच रहा
दिल मसोस कर
रह जाते हैं सैनिक मेरे ।
होगी कसीदा इस फटे आँचल की
यही विश्वास
है उपहार तुम्हारा ।
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