गुरुवार, 3 जुलाई 2014

सावन की बारिश पहली है !






सावन की बारिश पहली  है !

सखी आज
मैना न  आयी
अमराई में
कोयल न  कूकी ।
सूरज भी तो
घने बादलों से
बनी रज़ाई में
दुबका था ।
सोयी यादों को
कुरेदने हवा
कहीं से
बहती आई
मीठे दर्द
भार-उभर कर
मरहम –पट्टी
करने आई ।
पड़ने लगी जब
बड़ी-बड़ी बूंदें
पत्तियों की
मुस्कान खिल गयी
उनकी बची –खुची
बूंदों से
झुलसी दुबें भी
नहा रही थीं
प्यासी धरती की
आँचल भिंगी जब
सोंधी महक
बिखर गयी थी ।
नीम तले
झूला डालो अब
सावन की
सखी
बारिश पहली  है ।
(प्रेमकुमार)