अँधेरों में कितने बहे हैं ये आँसू...
रातों में कितने
बहे हैं ये आँसू
जगे जो सोये तो
जगाऊँ मैं कैसे ?
सजाये अँधेरों में
कितने ये दीपक
हवा बन बुझाओ
जलेंगे ये कैसे ?
निहोरे किए तो
चाँदनी आयी है
बादल बनोगी
छिटकेंगी ये कैसे ?
तितली में सपनों के
रंग रह गए गीले
फुहारे बनोगी तो
सूखेंगे कैसे ?
छाँटे हैं सीपों से
ये सफ़ेद मोती
बिखेरोगी लहरों में
ढूंढूंगा कैसे ?
चुने फूल नीले
पसंद के तुम्हारी
गुलदस्ते में लगा लो
मेरी यादों के ।
कोने से मन के
उगा राग तन्हा
न समेटो इसे
तुम अपनी धुनों में
बैसाखी बनेगी
क्षितिज के सफर का।
रातों में कितने
बहे हैं ये आँसू
जगे जो सोये तो
जगाऊँ मैं कैसे ?
सजाये अँधेरों में
कितने ये दीपक
हवा बन बुझाओ
जलेंगे ये कैसे ?
निहोरे किए तो
चाँदनी आयी है
बादल बनोगी
छिटकेंगी ये कैसे ?
तितली में सपनों के
रंग रह गए गीले
फुहारे बनोगी तो
सूखेंगे कैसे ?
छाँटे हैं सीपों से
ये सफ़ेद मोती
बिखेरोगी लहरों में
ढूंढूंगा कैसे ?
चुने फूल नीले
पसंद के तुम्हारी
गुलदस्ते में लगा लो
मेरी यादों के ।
कोने से मन के
उगा राग तन्हा
न समेटो इसे
तुम अपनी धुनों में
बैसाखी बनेगी
क्षितिज के सफर का।


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