मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013

बिना कहे जो गुजर गया ...


बिना कहे जो गुजर गया ...


मत करना अफसोस
यदि सहारा
अपना कोई
गुजर गया हो 
खुद सहारा बनना
अपना ।
यही कहा था
कहने को मुझसे
जो बिना कहे
तुमसे
गुजर गया  वह ।

मत करना अफसोस
यदि इस बसंत में
नहीं खिले हैं फूल
तुम्हारे
उस पौधे में
जिसे सींच कर
बड़ा किया था
रात दिन
बड़ी लगन से ।
कर लेना इंतजार
एक और बसत का
यह भी तुमसे
बिना कहे
गुजर गया वह ।

मत करना अफसोस
यदि अहसान तुम्हारे
भुला दिये हों सबने ।
यह तो फितरत है
दुनिया की
इसे भूल
जाना  ही होगा ।
यह भी
बिना कहे तुमसे
गुजर गया वह ।

मत करना अफसोस
यदि  प्रेम तुम्हारा
स्वीकार नहीं किया
किसी ने ।
मजबूरी से
घिरी  होगी वह ।
संवेदना के उसे
स्वर दे कर
सफर तय
करना ही होगा ।
यह भी
बिना कहे तुमसे
गुजर गया वह ।  

हादसों- भरी
इस जीवन में
बेसहारे बहुत मिलेंगे
उम्मीदों की आँखें उनकी
जब टिक जाए
तुम पर
मत करना अफसोस
केवल
बन जाना
सहारा उनका -
यह कहने को
तुमसे-
कह कर
गुजर गए वो ।






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