बादल का टुकड़ा
गाड़ी के पीछे शीशे से
बादल का टुकड़ा देखा है ।
सूख गयी जो नदी तपन से
राह तकती बारिश देखा है ।
प्यासी झील की आँचल के
कोने में लाल कमल देखा है ।
शुष्क पर्वत के ह्रदय से
पेड़ हरे उगते देखा है ।
झड़ रहे थे पत्ते जिनके
उन आँखों में कोंपल देखा है .
ममता की सूनी गोदी में
नन्हीं बिटिया का सपना देखा
है ।
गीली आँखों से ही उनकी
गीत सँवरते अपना देखा है ।
कंक्रीट के इस बियावान में
छिप कर खिले सदाबहार देखा है ।
गाड़ी के पीछे शीशे से
बादल का टुकड़ा देखा है ।

.jpg)
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें