शैलपुत्री : माँ का प्रथम रूप
शैलपुत्री !
प्रथम नाम है
माँ का ।
पर्वतराज
हिमालय की पुत्री ।
प्रथम दिन
जिनकी पूजा
होती है
माँ के रूप में ।,
पूर्व जन्म में
वही सती थीं
जो पुत्री थी
राजा दक्ष की
जिनके पिता
श्रीष्टि कर्ता
ब्रह्मा जी थे ।
सती का ब्याह
हुआ था शिव से ।
जब राजा ने
यज्ञ रचाया
सभी देवों को
किया निमंत्रित
पर नहीं बुलाया था
शिव को ।
भाते
नहीं थे
शिव उनको ।
कहा -पार्वती ने
शिव से
प्रबल इच्छा है
यज्ञ देखने की
मन ही मन में
माँ का प्यार
सता रहा था
मिलने का
मन था ज्यादा ।
शिव ने तब समझाया-
नियम विरुद्ध
होगा जाना
बिना बुलाये ।
जिद देख कर
सती का
शिव ने तब
आज्ञा दे दी ।
सती ने
जाकर देखा-
यज्ञ-भाव मिला है
सब देवों को
पर शिव को
वंचित किया गया है ।
उसकी भी
हो रही अनदेखी
पिता कुछ
नहीं बोले ।
बहनों ने आँखें
फेर लिया है।
माँ ही सिर्फ
संवेदनशील थी
पर बेवश थी ।
न सह सकी
अपमान पति का
यज्ञ –स्थल पर
सती हो गई ।
उन्मादित हो गए शिव
यह जान कर
शिव दूतों ने
यज्ञ –भंग किया
उठाया शिव ने
सती के शव को
सर पर रख
पागल की भांति
और लगे
तांडव करने ।
आशंका देख
प्रलय की
देवगण घबराए ।
अंग-भंग किया
सती का
मोह –भंग हो
जिससे शिव का
जहां गिरा
अंग सती का
शक्ति –पीठ -स्थल
बन गया माँ का ।
वही हुईं
शैलपुत्री
अगले जन्म में
पूजा होती है जिनकी
प्रथम दिन
माँ शैलपुत्री
के रूप में ।

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