गुरुवार, 17 अक्टूबर 2013

कहाँ- कहाँ ढूंढोगे रावण को ?

कहाँ- कहाँ ढूंढोगे रावण को ?

कोख में पलती बिटिया को

जीवन मुक्त कर देता है रावण ।                 
छूटी नहीं मेंहदी हाथ की
चिता सजा कर रख लेता है ।
बन कर श्रवण मात-पिता के
बैकुंठ- धाम भिजवा देता है।
फंसा कर चंगुल में जानकी को
ख़ुदकुशी का तोहफा देता है ।
जहर फैला कर भेद-भाव का
घर एक-दूसरे से जलवा देता है ।
बाजार गरम कर अफवाहों का
भगदड़ बन कुचल देता है ।
सभी धर्म के पवित्र कुंड में
बारूद का शोला रखता है ।
कहाँ- कहाँ ढूंढोगे रावण को
रक्त-बीज –सा पैदा होता है ।
काम-क्रोध-मोह-लोभ का रावण
रूप अनेक संवार रहा है ।
कहाँ- कहाँ ढूंढोगे रावण को
हम –सब में अब समा गया है ।












कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें