शनिवार, 24 अगस्त 2013

प्रिय का आगमन

प्रिय  का आगमन


बड़े वेग से लहरें आईं
तट छूकर वे चली गईं
बादल आए  उमड़-घुमड़ कर 
सोंधी –सोंधी महक  फैल गयी
सुबह की किरणें बिखर-बिखर कर
कमलों पर मोती उगा गईं
और सांझ चुपके से  आकर
सोयी हेना जगा गयी
रात की आहट पाकर
कलियाँ\ मुस्कुरा उठीं
ऐसा ही कुछ हुआ था
तुम्हारे आगमन पर ...







कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें