रविवार, 25 अगस्त 2013

स्वागत

स्वागत
द्वार पर खड़े हैं
हल्के- पीले–मखमली
केना के अनेक फूल
आरती उतारने ।
छींट रहे हैं अक्षत
जुगनू जैसे गुलाबी फूल ।
बाँहों में समेटने को आतुर हैं
केले के ये चिकने पात ।
चिलचिलाती धूप में
छाँव फैलातीं हैं
नेनूया के डिजाइनदार
बेल से लगी पत्तियाँ ।
आगुंतक का पदचाप
पहचान लेती है जेनी
स्वागत करेंगी –
इस  Small Wonder  में आपका
रानु – और प्रिया
क्या  माँ  और बेटी-?
नहीं- नहीं
सखी-सहेली जैसी ।
और प्रदीप ?
लगे होंगे
कितने घरों के
सपने सजाने में।











     

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