राखी
(1)
सरहद.पर डटे
जवान को
मिली है राखी ।
सदेशा है बहन का
भर-पूर लड़ो भाई
मिशाइल बनेगी
तुम्हारी कलाई
मान रखना
भारत माँ का
आँखों में आँसू
दिल पत्थर कर
लिखी थी बहना ।
(2)
जिस तट की रक्षा करते थे
तुमने कहा वह बदल गया है
पता बदला, भेजी राखी ...
पूनम रात तक
नहीं मिले तो
रेत कणों का तिलक लगा कर
बांधेगी लहरें राखी ।
(3)
आसमान के ऊपर से
गर्जन करता
गिद्ध जैसा कोई वाहन
जब गुजरता
दिल बैठता है
गाँव वालों का
सहमी-सहमी -सी
रहती बहना
भाग्यशाली तो हूँ मैं
जो भेज पातीं हूँ राखी ।
पर क्या समझाऊँ
उन बहनों को
जिनके भाई
बेवजह भेंट चढ़ गए
दुश्मनों के
और कुछ ने तो ली
जल –समाधि
गहरे - नीले सागर में !
!
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