प्रिय का संवाद
प्रिय
संवाद मिला
सागर से
मोती मिला
मन का कमल खिला
चलचित्र-सा बीता पल
घू....म.......ने लगा
क्या- क्या याद करूँ
उन पलों का
दिवस -साल में जो बदल गए
शिकवा......शिकायत का
समय नहीं.. अब
शाम ढलने को है
ऐसे में
संवाद तुम्हारा
आह्लाद का संचार कर गया ।
आनंद बरसे
झम -झमा –झम
जीवन के हर कोने में
यही है दिल में ।
प्रिय
संवाद मिला
सागर से
मोती मिला
मन का कमल खिला
चलचित्र-सा बीता पल
घू....म.......ने लगा
क्या- क्या याद करूँ
उन पलों का
दिवस -साल में जो बदल गए
शिकवा......शिकायत का
समय नहीं.. अब
शाम ढलने को है
ऐसे में
संवाद तुम्हारा
आह्लाद का संचार कर गया ।
आनंद बरसे
झम -झमा –झम
जीवन के हर कोने में
यही है दिल में ।
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