रविवार, 8 दिसंबर 2013

.. कीचड़ –भरी झील ..



 कीचड़ –भरी झील


 

जुगनू जिसे समझा था,

वह   ज्वाला  निकली ।

समझा था जिसे अबला ,

वह  दुर्गा      निकली ।

मोम की पुतली नहीं ,

कड़कती बिजली निकली ।

मछ्ली थी नहीं  रंगीन ,

काँटों भरी ह्वेल  निकली ।

छोटी – सी बात नहीं

कालिख –पुती कहानी निकली ।

थिंक टैंक की तहक़ीक़ात में

कीचड़ –भरी झील निकली ।

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