.. कीचड़ –भरी झील ..
कीचड़ –भरी झील
जुगनू जिसे समझा था,
वह ज्वाला
निकली ।
समझा था जिसे अबला ,
वह दुर्गा
निकली ।
मोम की पुतली नहीं ,
कड़कती बिजली निकली ।
मछ्ली थी नहीं रंगीन ,
काँटों भरी
ह्वेल निकली ।
छोटी – सी बात नहीं
कालिख –पुती कहानी
निकली ।
थिंक टैंक की
तहक़ीक़ात में
कीचड़ –भरी झील निकली
।
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