दिल्ली
का सिंहासन
बड़ी बात हो गयी
‘आप’ की सरकार हो गयी ।
बिल घटेगा बिजली
पानी का
उम्मीद जगा है जन –जन
का ।
जन –लोकपाल बिल
बनेगा
भ्र्रष्टाचारी कालिख मलेगा ।
वैशाली लौटी है
दिल्ली
जनता सिंहासन पर
बैठी ।
दल –दल क्यों बेदखल
हो गए ?
नहीं समझ पा रहे हैं कोई ।
चिंतन –मनन वे कर रहे हैं
घाट –घाट के पानी जो पीये हुए हैं ।
साध रखी है गुरु ने चुप्पी
गुर यह कोई और भी
सीखेंगे ।
कोई कहते, टांग हम खीचेंगे ही
सिंहासन पर हम
बैठेंगे हीं ।
भारत भाग्य विधाता
हैं हम
जनता को यह समझा देंगे ।
चमकेगा जहाँ सितारा
उनका
आसमान वह दिखला
देंगे ।
23/12/2013


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