जन्म-दिन : एक और
नज़र मेँ
प्रेमकुमार
जिन्दगी की
किताब का
एक
और पन्ना
पलट गया
हवा के
झोंकों से
जिन्दगी के
आईने मेँ
एक
और चेहरा
खो गया ।
मुरझाए
फूलों मेँ
एक
और गुलाब
समा गया ।
यादों की
लहरों को
एक और लहर
छू गयी ।
रात एक
कट गयी
सुबह के
होने मेँ
आयी जब सुबह
वह
हाथ से
फिसल गयी ।
बुझी हुई
मोमबत्तियों के
आँगन मेँ
जला दिया
एक और ...
बुझने के लिए
मोमबत्ती !
29/11/2013
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