मंगलवार, 1 अक्टूबर 2013

विनती है बापू से एक : प्रेमकुमार

On  The Occassion Of Gandhi Jayanti:A Prayer To Bapu:P K Jayaswal
गांधी जयन्ती के अवसर पर एक रचना : विनती है बापू से एक : प्रेमकुमार
http://premkumar39.blogspot.com/2013/08/blog-post.html


विनती है बापू से एक


बापू तुम 
अवतरित होना
इस भारत में 
एक बार फिर !

सत्य, अहिंसा और प्रेम
मिट गया है 
सबके दिल से।
घोला गया है ज़हर
संदेह का
सबके मन में ।
बना रहें हैं
जगह-जगह
नोआखाली 
राजधर्मी ।
संवेदना की सरिता
सूखी
घड़ियाली आँसू 
बहते हैं
दंगे-फसाद के 
रंग –मंच पर
मुर्गे लड़ा कर
खेल देखते हैं।
द्रवित हो 
जख्मी मुर्गे की
मुआवजा का
एलान करते हैं।
कुष्ट-रोग से
ग्रसित गरीबी
आंकड़ों में
तौली जाती है
और आंकड़ों के
बने वोट से
सत्ता- द्वार 
खोल लेते हैं ।
सत्ता है यह ज़हर...
जनता सुनती है...
और सदा- सर्वदा
सदाचार का 
पालन करती है
अभावों से जूझती 
रहती है
तीन-बंदर के
आदशों पर वह
चलती रहती है ...
एक कामना 
है बस उसकी
इस धरा पर
एक बार फिर 
आना बापू !
अपनों से यह 
सू-राज  छिनना
नया सपना कोई 
राम-राज्य का
हमें न देना ।













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